आप्रवासी उद्यमिता: पोलैंड में सुदूर पूर्व के आप्रवासियों की उद्यमशील गतिविधियाँ

इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य है पोलैंड में रहते हुए सुदूर पूर्व (चीन, वियतनाम, दक्षिण कोरिया, भारत, फिलीपींस) के आप्रवासियों द्वारा किए गए उद्यमशील गतिविधियों की जाँच करना और समझना।

इस परियोजना को अग्रणी (नवीन) परियोजना के रूप में वर्णित किया जा सकता है क्योंकि यह अनुसंधान के मौजूदा रुझानों का अनुसरण करता है, लेकिन उन्हें एक अलग (पोलिश) संदर्भ में डालता है। मानव प्रवास की घटना आजकल ज्यादा से ज्यादा ध्यान आकर्षित करती है और इसका विश्लेषण कई विभिन्न दृष्टिकोणों से किया जाता है। आप्रवासी समूहों को, उनके उद्देश्यों और कार्यों को, समझने के लिए प्रवास का आर्थिक पहलू महत्तवपूर्ण कारकों में से एक माना जाता है। प्रवास प्रक्रियाओं के ऊपर कई अध्ययन किये गए हैं लेकिन उनमें से ज्यादातर उद्यमशील गतिविधियों से जुड़े नहीं हैं। पोलैंड में रहने वाले आप्रवासियों की कम आबादी (देश की आबादी के 1 प्रतिशत से कम) अध्ययन की कम संख्या का एक कारण हे सकता है। लेकिन इस पर भी ध्यान रखना ज़रूरी है कि आप्रवासी समुदाय बढ़ते जा रहे हैं और अधिक से अधिक विविध हो जाते हैं क्योंकि उनमें से बहुत समुदाय भौगोलिक और सांस्कृतिक रूप से दूर देशों से आते हैं। अक्सर आप्रवासी अपना व्यावसायिक उद्यम खोलने का फैसला कर लेते हैं। आर्थिक जीवन के इस पहलू की लापरवाही ज्ञान के अंतर भरने का एक अवसर पैदा करती है।

इन सभी कारणों से हमने सुदूर पूर्व से आए आप्रवासियों की उद्यमिता अपनी परियोजना का एक केंद्रीय पहलू बनाया है। सुदूर पूर्वी जातीय समूह काफी बड़े हैं (जैसे वियतनामी), एकीकृत और बाहर के लोगों के लिए बंद। इस चुनौती का सामना करना परियोजना संघ के निर्माण का मुख्य तर्क था: भागीदार (मध्य व सुदूर पूर्व संस्थान, याग्येलोन्यान विश्वविद्यालय, प्रबंधन संकाय, वारसा विश्वविद्यालय) अपने पिछले अनुसंधान और सामाजिक गतिविधियों के कारण विभिन्न समूहों तक पहुँच सकते हैं। यह इस परियोजना को संभव बनाता है और अध्ययन में अंतर भरने तथा आप्रवासियों पर ज्ञान को व्यापक बनाने में मदद करेगा।

राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र द्वारा वित्त पोषित परियोजना (UMO-2016/21/B/HS4/00767)

बेआता ग्लींका (Beata Glinka) – अनुसंधान परियोजना के प्रमुख

Beata Glinka

प्रोफ़ेसर प्रोजेक्ट लीडर, अनुसंधान और संपर्क के लिए उप-डीन, प्रबंधन संकाय, वारसा विश्वविद्यालय। उनके अनुसंधान के प्रमुख क्षेत्रों में आप्रवासियों की उद्यमिता तथा प्रबंधन और उद्यमशीलता की गतिविधियों का सांस्कृतिक संदर्भ शामिल हैं।

आदम येलोनेक (Adam Jelonek)

प्रोफ़ेसर और मध्य व सुदूर पूर्व संस्थान, याग्येलोन्यान विश्वविद्यालय, के प्रमुख। अंतर्राष्ट्रीयकरण के लिए रेक्टर के प्रतिनिधि। उनके अनुसंधान के प्रमुख क्षेत्रों में राजनीतिक नृविज्ञान, सामाजिक विकास के सिद्धांत, पूर्व एशिया के राजनीतिक व्यवस्था शामिल हैं।

आग्न्येश्का ब्ज़ोज़ोव्स्का (Agnieszka Brzozowska)

सहायक प्रोफ़ेसर  प्रबंधन संकाय, वारसा विश्वविद्यालय

उनके अनुसंधान के प्रमुख क्षेत्रों में आप्रवासियों की उद्यमिता, उद्यमशील प्रक्रियाओं का सांस्कृतिक संदर्भ तथा उद्यमशील कौशल का विकास शामिल हैं।

रेनाता चेकाल्स्का (Renata Czekalska)

सह – प्राध्यापक मध्य व सुदूर पूर्व संस्थान, याग्येलोन्यान विश्वविद्यालय। मध्य व सुदूर पूर्व संस्थान के उप प्रमुख तथा कोरिया विभाग के प्रमुख।

उनकी विशेषज्ञता सांस्कृतिक अध्ययन में है, ख़ास तौर पर भारत और दक्षिण एशिया पर ध्यान देते हुए।

मीहाल लुबीना (Michał Lubina)

सहायक प्रोफ़ेसर, मध्य व सुदूर पूर्व संस्थान, याग्येलोन्यान विश्वविद्यालय।

उनकी विशेषज्ञता सामाजिक विज्ञान और राजनीति विज्ञान में है। उनके अनुसंधान के प्रमुख क्षेत्रों में समकालीन बर्मा और रूस-चीन संबंध शामिल हैं।

यूलीता माय्चिक (Julita Majczyk)

सहायक प्रोफ़ेसर, प्रबंधन संकाय, वारसा विश्वविद्यालय।

उनके अनुसंधान के प्रमुख क्षेत्रों में उद्यमशील व्यवहार, प्रशासन की शैली, नेतृत्व और टीम प्रेरणा शामिल हैं।

माल्गोज़ाता ओशिंस्का (Małgorzata Osińska)

अंतरराष्ट्रीय और राजनीतिक अध्ययन विभाग, याग्येलोन्यान विश्वविद्यालय, में पीएचडी छात्रा।

वे आधुनिक शहरों और अंतराल-जगह के संबंध पर तथा शहर की छवि में परिलक्षित स्थानीय पहचान के निर्माण की प्रक्रियाओं पर अंतःविषय अनुसंधान आयोजित करती हैं।

आग्न्येश्का पोस्तुआ (Agnieszka Postuła)

सहायक प्रोफ़ेसर, उद्यमशीलता और प्रबंधन प्रणाली विभाग, प्रबंधन संकाय, वारसा विश्वविद्यालय

वे संगठनात्मक नृविज्ञान पर अध्ययन करती हैं और संचार, व्यवसाय, संस्कृति और सामाजिक भूमिकाओं पर क्षेत्रीय अनुसंधान आयोजित करती हैं।

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